शनिवार 28 फ़रवरी 2026 - 06:03
रोज़े के अहकाम । हुक्म ना जानने की वजह से रोज़ा बातिल करना

हज़रत आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने हुक्म की जानकारी न होने पर रोज़ा बातिल करने के बारे में एक सवाल का जवाब दिया है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, इस्लामिक क्रांति के लीडर ने इस मुद्दे की जानकारी न होने पर रोज़ा बातिल करने के बारे में एक सवाल का जवाब दिया। शरई अहकाम मे रूचि रखने वालों के लिए सवाल और उसके जवाब का पाठ प्रस्तुत किया जा रहा है:

मस्अले की जानकारी न होने पर रोज़ा बातिल करने का हुक्म

सवाल: कोई व्यक्ति जानबूझकर इस मस्अले की जानकारी न होने पर अपना रोज़ा बातिल कर देता है। अब उसकी क्या ज़िम्मेदारी है? क्या उसके लिए सिर्फ़ छूटे हुए रोज़े की क़ज़ा करना ज़रूरी है या उसे कफ़्फ़ारी भी देना चाहिए?

जवाब: अगर कोई इंसान शरई हुक्म से अनजान होने की वजह से ऐसा कुछ करता है जिससे रोज़ा बातिल हो जाता है, जैसे उसे यह नहीं पता था कि खाने-पीने की दूसरी चीज़ों की तरह दवा लेने से भी रोज़ा बातिल हो जाता है, और वह रमज़ान के मुबारक महीने में रोज़ा रखते हुए दवा ले लेता है, तो उसका रोज़ा बातिल हो गया है और उसे इसकी क़ज़ा करनी होगी, लेकिन इसका कफ़्फ़ारा उस पर ज़रूरी नहीं है।

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